Environment

वैज्ञानिक की ओर से, प्लास्टिक कचड़ा की प्रदूषण से मुक्ति का उपाय :-

कोई भी योजना बनाते वक्त ये ध्यान देना जरूरी है, कि आदमी का मन लोभ-लालच से भरा होता है | इसलिए योजना की संचालन विधि वर्क, वर्कर के लिए लाभांवित करने वाला हो ऐसी    योजना ही जनहित में डिमांडेड हो जाता है |

प्रस्तुत हैं : राष्ट्र के समक्ष वर्णित विचार पर आधारित प्लास्टिक कचड़ा प्रदूषण की भीषण समस्या का समाधान की उपाय, इस उपाय में मात्र ये उपाय करना है कि, चार – पांच लाख की आबादी के हिसाब से प्रत्येक शहर के निकटतम जिला या क्षेत्र में, एक प्लास्टिक दाना बनाने वाली फैक्ट्री का निर्माण हो, जो विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक कचड़ा को गलाकर विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक दाना तैयार करे, जिसका कीमत होता है जिसके द्वारा पुनः नई विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक वस्तु तैयार होंगे | बस इतना ही जरूरत है, सरकारी मदद की ओर से, वर्णित विषय को लेकर लोग शहर की गली – कोचियों, नदी, नालों में हो रहे अवरोधक (जाम) कचड़ो को चुन – बिछ कर वजन के हिसाब से सरकार के द्वारा निर्धारित मूल्य पर विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक कचड़ो की खरीद होंगे | उस कचड़ो में टेबल, कुर्सी, टीवी, फ्रिज एवं छोटे – बड़े सैकड़ो प्रकार के उपकरणों तथा अनेक प्रकार के पॉलिथीन इत्यादि के कचड़ा होगा | इसी उपाय में वर्णित प्लास्टिक प्रदूषण समस्या का समाधान है |

शीर्षक: प्रस्तुत हैं राष्ट्रहित व जनहित में प्लास्टिक कचड़ा की प्रदूषण से मुक्ति पाने का आविष्कृत उपाय:- प्लास्टिक की बनी हुई विभिन्न प्रकार की वस्तुएं देश वासियों को बहुत सस्ती मूल्य में, बहुत बड़ी सुविधा प्रदान करने वाली साधन बन गई है | इस के माफिक (तुलना) दूसरा साधन कोई और नहीं |

लेकिन इस कचड़ा से, देश के सभी शहर, गांव, गली, मोहल्ला एवं इससे निकलने वाली छोटी – बड़ी नदी, नाला इत्यादि के बाहों में, बाधक बन कर प्रदूषण फैलाने वाली भीषण समस्या बन गई हैं | इस समस्या से जूझने में सरकारी राजकोष से भारी धनराशि खर्च हो रही है |

इसलिए पॉल्यूशन के अंतर्गत, पॉलिथीन के उपयोग साधन पर, रोक लगाने की कई सरकारी योजनाएं होते रहते हैं, जो व्यर्थ साबित हो रहे हैं | क्योंकि प्लास्टिक पॉलिथीन बहुत सस्ती मूल्य में, बहुत बड़ी सुविधा प्रदान करने वाली, डिमांडडे वस्तु बन गई है | ऐसे में कहा गया हैं, कि डिमांड और सप्लाई का अटूट रिश्ता है | इस पर रोक लगाना नामुमकिन है |

ऐसे में, देश के पक्षधर को यह सोचना चाहिए कि, जिस तरह सुविधा के हिसाब से

देशवासियों के लिए, प्लास्टिक वस्तुएं डिमांडडे विषय बन गई हैं | उसी प्रकार प्लास्टिक कचड़ो के निजात हेतू, जो उपाय, माध्यम हो, वे भी डिमांडडे हो, ताकि उस डिमांडडे उपाय की खासियत से, खुद वा खुद प्रदूषण फैलाने वाले कचड़ो की सफाया ऑटोमेटिक ढंग से होता रहे |

अर्थात वर्णित भाव का, ये मतलब हुए कि, डिमांडडे चीज में हो रहे समस्या के, समाधान में, समाधान युक्ति भी डिमांडडे हो, तभी समस्या को खत्म किया जा सकता हैं, ना की डिमांडेड चीज पर, नाकाम होने वाली प्रतिबंध लगाया जाए |

जिस प्रकार लाखों रुपयों की, सुविधा प्रदान करने वाली एक किलो प्लास्टिक पॉलिथीन एक- दो सौ रुपया में प्राप्त होता है | ठीक उसी प्रकार प्रदूषण के मामले में लाखों रुपयों का नुकसान करने वाली एक  किलो पॉलिथीन का कचड़ा, सौ रूपया में खरीदवा कर लाखों की नुकसान को खत्म किया जा सकता है |

इसमें सोचने वाली बात यह है कि, एक  किलो नई पॉलिथीन लाखों रुपयों की वस्तुओं की सेवा, सुविधा प्रदान करती हैं और वही एक किलो पॉलीथिन का कचड़ा, जो प्रदूषण कर, लाखों रुपयों का नुकसान करता है | उस एक किलो की कचड़ा को मात्र एक सौ रुपयों  में खरीदवाकर, लाखों रुपयों के प्रदूषण से होने वाले नुकसान से, निश्चित रूप से देशवासियों को बचाया जा सकता हैं | इस तरह मात्र सौ रूपये किलो कि, कचड़ा खरीदगी  सरकारी अभियान से, एक लाख रुपयों की सेवा प्रदान करने वाली साधन एवं लाख रुपया प्रदूषण में खर्च होने वाली धनराशि अर्थात दोनों प्रकार के लाभान्वित पहलू को बचाया जा सकता है |

इस प्रकार मात्र सौ रुपयों  की कचड़ा खरीद लागत में, दोनों भूमिका के तहत, दो लाख रुपयों की लाभान्वित पहलू प्राप्त होता रहेगा |

इस कार्य में करोड़ों खर्च होगा तो, लाखों-अरबों रुपयों का लाभ, राष्ट्रहित व जनहित में प्राप्त होगा | जिसके तहत और भी अनगिनत लाभ का स्रोत बनेंगे, देशवासियों के लिए |

जिसका निम्नलिखित विवरण इस प्रकार हैं :-

लाभ में :-

  1. प्लास्टिक कचरा चुनने-बिछने वाली कार्य के अंतर्गत, मिल रहे आमदनी के लोभ, मैं करोड़ों गरीब लोगों को काम मिलेगा | जिसके तहत गंदगी में भी गड़े, प्लास्टिक कचरा निकल जाएगा | जिसके अंतर्गत छोटी-मोटी बारिश का पानी, शहर में बाढ़ का समस्या उत्पन्न नहीं करेगा |
  2. देश में इस प्रकार, प्लास्टिक कचड़ा चुनावी अभियान से, अधिक से अधिक प्लास्टिक स्टोर होगा तो, सस्ते दामों में घर के खिड़की, दरवाजा, अलमारी इत्यादि अधिक मात्रा में बनने लगेंगे |
  3. प्लास्टिक कचड़ा की कीमत को समझते हुए, प्रत्येक घर की गृहिणी, उसे इधर उधर ना फेंक कर उसे, बिक्री हेतु घर में ही संभाल कर रखेंगे | इसके तहत गली-मोहल्ले इन कचड़ो की, प्रदूषण से बचे रहेंगे |
  4. शहर की छोटे-बड़े नालों में, प्लास्टिक कचड़ा अवरोध के कारण, भीषण प्रदूषण तथा गंदगी माहौल का परेशानी खत्म होगा |
  5. निकट शहरों में, कचड़ा प्लास्टिक को पुनःगलाकर, नई प्लास्टिक का छोटा-बड़ा दाना (कच्चा माल) तैयार करने वाली फैक्ट्रियां के होने से, पूरे देश में ,ऐसे-ऐसे फैक्ट्रियों के अंतर्गत करोड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा और इस कर्मचारियों की मेहनताना मूल्य, नई तैयार प्लास्टिक मटेरियल की बिक्री मूल्य से ही मिलते रहेंगे | तथा इस खासियत के तहत सरकार की धनराशि खर्च होने की, अधिक नौबत नहीं आएगी |
  6. जब अपने –अपने ही शहर में, इस प्रकार की फैक्ट्री होगा तो, और भी कई प्रकार के फैक्ट्रियां बनते रहेंगे, तो रोजगार बढ़ेगा, जिसके अंतर्गत उस जगह के लोगों को रोजगार हेतु दूरदराज शहरों में नहीं जाना पड़ेंगे |
  7. ऐसे में, यदि घर पर कुछ खेती-बाड़ी है तो, उसमें भी साग, सब्जियां की उगाही का लाभ प्राप्त होगा |
  8. कहा भी जाता है की, अपने शहर की आधी रोटी भी, भली होती हैं |लेकिन ऐसे में अपने शहर में भी भरी-पूरी रोटी का साधन हो जाएगा |
  9. इसके अंतर्गत परिवार में, कमजोर, बड़े, बुजुर्ग के देख भाल भी होता रहेगा |
  10. ऐसे फैक्ट्री अपने शहर में होने से उसके कर्मचारियों को ना किमती आवास की चिंता होगी और ना दूर रहने की विभिन्न परेशानियों की |
  11. अपने शहर में कमाए हुए पैसों, अपने ही शहर में खर्च होगा तो, अपना ही शहर के बाजार का रौनक व रोजगार बढ़ेगा |
  12. कचरा चुनाई में वह सभी प्रकार की प्लास्टिक कचड़ो की मजदूरी, कीमत मिलनी चाहिए जिसकी जरूरत प्लास्टिक दाना (रिसायकल) बनाने के लायक ना हो |

उसे प्रदूषण मुक्त के, दृष्टिकोण के तहत उसको भी ठिकाना लगाना है, जला-गला कर, अलकतरा के रूपांतरण से, सड़क निर्माण में, नई टेक्निक से, काम लिया जा सकता है |

  1. वर्णित फायदे के अंतर्गत, जैसे फायदे के लिए किसान खोद –खोद , खोज – खोज कर जमीन से आलू, प्याज निकाल लेता है | ठीक उसी प्रकार आमदनी की चाहत में, गांव, शहर, गली, कूची, नदी, नालो वा कूड़ा- कचड़ो में से खोद-खोद कर सभी प्रकार के प्लास्टिक कचड़ा को निकालकर सही ठिकाना लगा देंगे |

ऐसे में प्रदूषण फैलाने वाली कचड़ा का समस्या कहां | बस देर हैं प्लास्टिक कचरा चुनाई तथा उसे रिसाइक्लिंग अभियान के लिए सरकारी चाहत की |

  1. सोचने की बात हैं, वर्णित प्लास्टिक कचरा चुनाई अभियान में, कितने लाभान्वित पहलू साफ साफ नजर आ रहा है तो इस ओर जल्द से जल्द सरकार की ओर से कोशिश होनी चाहिए |